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लोक गीत

newly graduated people wearing black academy gowns throwing hats up in the air

भारतीय शिक्षा में सुधार

भारतीय शिक्षा व्यवस्था में जिस सुधार की हम बात करते हैं, वह ये नहीं है कि आधुनिक शिक्षा के विषयों को पूर्णतः हटा दिया जाए। तात्पर्य यह है कि विषयों को इस प्रकार से समायोजित किया जाए कि छात्रों को पूरी जानकारी मिल सके।

वास्तविक शिक्षा

वास्तविक शिक्षा

वास्तविक शिक्षा वही है जिसे आपने अपने जीवन में उतारा हो। जिन अच्छी बातों की जानकारी हो या जिन अच्छी बातों को आप जानते हों, उससे कोई लाभ नहीं है जैसे औषधि को रखने, देखने या जानने से कोई लाभ नहीं, लाभ तभी है जब आप उसका सेवन करें।

पुराणों की सत्यता

पुराणों की सत्यता

इतिहास ग्रंथों को लिखने का प्रयोजन यह है कि हम उन्हें जाने, उनसे सीख ले सकें, लेकिन सीख लेने को छोड़ कर बाकी सब कुछ करने के लिए हम तैयार रहते हैं, हम उनकी सत्यता का, काल का पता लगाते हैं।

व्यक्ति की सुंदरता

व्यक्ति की सुंदरता

आजकल देखा जाता है कि लोग एक दूसरे की कमियाँ बहुत जल्दी ढूंढ लेते हैं चाहें हममें खुद में कितनी भी बुराइयाँ हों लेकिन हम हमेशा दूसरों की बुराइयों पर ही ध्यान देते हैं कि अमुक आदमी ऐसा है, वो वैसा है।

राजा की तीन सीखें

राजा की तीन सीखें

अपनी बात को ही सही मान कर उस पर अड़े मत रहो, दिमाग खोलो और दूसरों के विचारों को भी जानो। संसार ज्ञान से भरा पड़ा है, चाह कर भी तुम अकेले सारा ज्ञान अर्जित नहीं कर सकते, इसलिए भ्रम की स्थिति में किसी व्यक्ति से सलाह लेने में संकोच मत करो।

दर्शन और देखने में अंतर

दर्शन और देखने में अंतर

देखने का मतलब है, सामान्य देखना जो हम दिनभर कुछ ना कुछ देखते रहते हैं। किन्तु दर्शन का अर्थ होता है – जो हम देख रहे हैं ‘उसके पीछे छुपे तथ्य और सत्य को जानना’। देखने से मनोरंजन हो सकता है, परिवर्तन नहीं। किन्तु दर्शन से मनोरंजन हो ना हो लेकिन परिवर्तन अवश्यम्भावी है।

दायित्व, पुण्य और धर्म

दायित्व, पुण्य और धर्म

“दायित्व” और “पुण्य” इन दोनों को सुचारू रूप से करना ही “धर्म” कहलाता है। आप धार्मिक तभी हो सकते हैं जब अपने ‘दायित्व’ और ‘पुण्य’, इन दोनों कर्मों को ठीक-ठीक समझें और उनका निर्वहन करें।

राजा भर्तृहरि की कथा

राजा भर्तृहरि की कथा

पत्नी के धोखे से भर्तृहरि के मन में वैराग्य जाग गया और वे अपना संपूर्ण राज्य विक्रमादित्य को सौंपकर उज्जैन की एक गुफा में आ गए। उस गुफा में भर्तृहरि ने 12 वर्षों तक तपस्या की थी।

एक बच्चा जब गुरु बना

एक बच्चा जब गुरु बना – (ज्ञान का प्याला)


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एक सिद्ध महान् संत समुद्र तट पर टहल रहे थे। समुद्र के तट पर एक बच्चे को रोते हुए देखकर पास आकर प्यार से बच्चे… Read More »एक बच्चा जब गुरु बना – (ज्ञान का प्याला)

छोटे से मंत्र का जप करने से क्या होगा?

छोटे से मंत्र का जप करने से क्या होगा?


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बात उस समय की है जब पद्मविभूषण से सम्मानित पंडित गोपीनाथ कविराज अपने गुरुदेव स्वामी विशुद्धानंद जी के आश्रम में रहकर सेवा-साधना कर रहे थे।… Read More »छोटे से मंत्र का जप करने से क्या होगा?

संगति, परिवेश और भाव

संगति, परिवेश और भाव


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एक राजा अपनी प्रजा का भरपूर ख्याल रखता था। राज्य में अचानक चोरी की शिकायतें बहुत आने लगीं, कोशिश करने से भी चोर पकड़ा नहीं… Read More »संगति, परिवेश और भाव